Monday 24th of August 2026 01:09:03 PM

बैंक मैनेजर पर आग बबूला हुए जिलाधिकारी उमेश मिश्रा, अधेड़ दम्पति को बर्बाद करने में जुटे बैंक को संवेदनशीलता से काम करने के निर्देश


 

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मुजफ्फरनगर। मुख्य कर्जदार को छोड़कर गारंटर की धर पकड़ को जुटे बैंक की करतूत जब जिलाधिकारी के सम्मुख आई तो जिलाधिकारी भन्ना उठे। उन्होंने संबंधित बैंक के अधिकारी को जमकर मानवता का पाठ पढ़ाते हुए लताड़ पिलाई। उन्होंने बैंक अधिकारी को साफ तौर पर कहा कि अगर उनके पास आये पीड़ित के स्थान पर वे होते तो क्या होता। उधर बैंक अधिकारी ने जब नियमों का हवाला देने का प्रयास किया तो जिलाधिकारी ने पूरे घालमेल की जांच कराने की चेतावनी देते हुए बैंक अधिकारी को पीड़ित को राहत दिलाने का निर्देश दिया। दरअसल जिलाधिकारी प्रतिदिन की भांति अपने कार्यालय में बैठकर जन समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान एक अधेड़ उम्र का दम्पति उनके पास अपनी पीड़ा लेकर पहुंचा। पीड़ित दम्पति में महिला ने बताया कि उसका नाम सुमन शर्मा है व उनके साथ उनके पति आये हैं। महिला सुमन ने बताया कि वह शिव नगर, सुभाष नगर की गली संख्या तीन की निवासी है। वहीं गली संख्या 6 में दीपा शर्मा पुत्नी पुनीत रहती है। दीपा शर्मा के पति पुनीत कुमार ने भोपा रोड पर टीएस मान मार्किट में दुर्गा इण्डस्ट्रीज के नाम से ईई कोर व आई कोर व स्टेबलाईजर, बैट्टे बनाने की फैक्ट्री लगा रखी है। पुनीत कुमार ने 8 फरवरी 2017 को यूको बैंक शाखा प्रकाश चौक से अपनी फर्म दुर्गा इण्डस्ट्री पर 20 लाख रूपये का लोन लिया था, जिस लोन में वह तथा पुनीत की पत्नी दीपा गारन्टर है। सुमन ने आरोप लगाया कि पुनीत कुमार ने बैंक की कुछ किश्तें जमा करके फिर किश्त देनी बन्द कर दी थी। सुमन शर्मा ने बताया कि गारन्टी में बैंक में उसके मकान का बैनामा बन्धक है। सुमन शर्मा ने जिलाधिकारी को बताया कि वह अनपढ़ महिला है। केवल अपने हस्ताक्षर करना जानती है। बैंक में लोन के दौरान उसे यह बताया गया था कि यह जो लोन हो रहा है वह फैक्ट्री पर है। उसे यह पता नहीं था कि अगर पुनीत पैसा नहीं देगा तो बैंक उससे पैसा वसूल करेगा। नहीं तो वह बिल्कुल भी हस्ताक्षर नहीं करती। अब वह बैंक से बार-बार यह कहती आ रही है कि आपने जिसको पैसा दिया है आप उसी से पैसा वसूल क्यों नहीं करते। साहब में सुमन शर्मा पांच साल से कोर्ट कचहरी के चक्कर काट-काटकर थक चुकी है। उसने बताया कि बैंक ने 6,50,000 रूपये जमा करने के लिए कहा था। जब बैंक ने ज्यादा दबाव बनाया तो उसने बैंक में 3,70,000 रूपये जमा किये थे। अब बैंक कह रहा है कि जो पैसा उन्होंने जमा किया है उस पैसे को ब्याज में काट लेंगे। सुमन ने गुहार लगाई कि अगर बैंक उसका मकान बेचता है तो उसका परिवार सड़क पर आ जायेंगे। पीड़ित दम्पति की बात सुनकर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा भावुक हो गये और उन्होंने तुरंत बैंक मैनेजर से बात की। बैंक मतैनेजर से उन्होंने कहा कि जब कर्जदार के पास सम्पति है तो उससे वसूली क्यों नहीं की जा रही। इस पर बैंक मेनेजर ने नियमों का हवाला दिया। इस पर जिलाधिकारी आग बबूला हो गये। उन्होंने बताया कि ऐसे गोरखधंधे वे अपने गाजियाबाद कार्यकाल के दौरान देख चुके हैं। उन्होंने कहा कि तब ऐसे प्रकरणों की जांच उन्होंने सीबीआई को रैफर करा दी थी। जिलाधिकारी ने बैंक मैनेजर को इस प्रकरण पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिये।

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